The dreams! should we watch? should we nurture? and what should we do when the dream get broken and the reality and the truth become clear. nothing but your wisdom and consciousness can show you the right path, on contrary chances are there when you feel yourself directionless and aimless.
मैं बचपन से सपने देखने से डरता था, क्यूंकि मुझे सपने टूट
जाने का भय लगा रहता था, छोटी सी उम्मर में ही एक प्यारा सा सपना टूट गया था,
दुनिया बिखर सी गयी थी, बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला था मैं ने| मुझे हरेक सपने
में यही भय दीखता था, क्यूंकि मुझ में सहने की हिम्मत नही थी, तब नासमझ था और डरता
था बहुत, लेकिन ज़िन्दगी का कुछ और प्लान था, मैं ने फिर से सपने देखे, सपने
निहारे, खूबसूरत सपने बनाये भी, और फिर वक़्त के साथ टूटे भी, सपने टूटने पर दर्द
बहुत होता है, क्यूंकि सालों से संझोय हुए सपने टूटने पर आपकी दुनियाँ बिखर सी
जाती है, सब टूटा टूटा लगता है| सपने टूट जाने के बाद हम अपने आप को किसी खंडर में
पाते हैं जहाँ सब कुछ बिखरा बिखरा होता है और आप बे-बस, अनजान कहीं उस मलबे के ढेर
में खुद को बेठा हुआ पाते हैं, तब कुछ समझ ही नहीं आता की शुरुआत कहाँ से करनी है,
अक्सर ज़िन्दगी के इस मोड़ पर हम हारने से लग जाते हैं|
मुझे भी एक वक़्त में कुछ समझ नहीं आता था, सब बिखरा बिखरा
सा था, मलबे के ढेर में खुद को अकेला पाता था मैं, वक़्त के साथ मैं ने फिर से सब
कुछ बनाना सीखा, बिखरी हुई हरेक चीज़ को समेटा और एक नया रूप देना सीखा, ये पाया की
चीज़ें जब टूट जाया करती हैं, इंसान अगर हिम्मत न हारे तो टूटी चीज़ों से भी सुन्दर
सुन्दर चीज़ें बनाई जा सकती हैं|
अब ये समझ आता है की सपने देखने चाहिए और सपनों को टूटने
देना चाहिए, सपने टूटने से हम अपने करीब
आते हैं, खुद को समझते हैं, खुद से दोस्ती करते हैं, खुद से प्रेम करते
हैं| सपनों के टूट जाने से हमारी ख्याली दुनियाँ टूट जाती है और हम असलियत के
रूबरू होते हैं, सच को देख पाते हैं, और सच की बुनियाद पर अपनी ज़िन्दगी का सफ़र
शुरू कर सकते हैं|
सपने टूटने से हमारा एह्न्कार टूटता है, विशवास टूटता है,
भरोसा टूटता है, मन में बनी कहीं सारी तस्वीरें टूटती हैं, हम खुद को शुन्य की
अवस्था में पाते हैं, तब किसी से कोई शिकायत नहीं रहती क्यूंकि जब किसी से
उम्मीदें ही नहीं रहती तो शिकायतें कैसी, इस अवस्था में आप खुद के सबसे ज्यादा
करीब होते हो, खाली हाथ, खाली मन, चुप-चाप, चेहरे पे एक हंसी जो समझ से प्रे हो|
यहीं से आप खुद को फिर से बनाना शुरू करते हो, सच का सामना
करते हुए, हकीकत को समझते हुए, स्वीकार करते हुए, फिर आप अपने ही मित्र, प्रेमी और
हम-सफ़र हो जाते हो, खुद पे विशवास, भरोसा जगाते हो, मन में प्रेम पनपने देते हो,
सीखते चले जाते हो ज़िन्दगी से, फिर ये ज़िन्दगी आपकी अपनी होती है और जो अपना होता
है वो कभी नही खोता|
एक वक़्त पे आप सपने टूट जाने से डरते नहीं हो बल्कि उनको
टूटने देते हो, और फिर से पनपने देते हो, जैसे खेत में हल लगाने से मिटटी की परत
टूटती है तभी तो उस में फसलें, फूल उग पाते हैं| सपनों के टूटने से डरना मत,
उन्हें टूटने देना और फिर से बार बार खुद को बनाते रहना|
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