कितना कठिन है यहाँ बिकने से बच पाना,
हर रोज़ लगाने आते हैं
सौदागर तुम्हारी कीमत बाज़ार में,
किस क़दर कठिन है सचे प्रेम का पनप पाना या पनपते रहना,
यहाँ
मुश्किल है फर्क कर पाना मुहब्बत में और व्यापार में|
ज़रूरतें इस क़दर हावी हो चली हमारी ज़िन्दगी पर की कठिन है बिना
ज़रूरत के किसी के साथ होना, हर कोई मशगूल है पा लेने और छोड़ देने के इंतज़ार है|
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