लफ्ज़, हकीकत और उमीदें|
ये बात काफी हद तक सची है की लफ्जों में और हकीकत में बहुत
बड़ा फासला होता है, जो कहा जाये वैसा ही हर कोई कर पाए तो इससे बड कर दुनियाँ जहां
में शायद कुछ न हो| लेकिन, लफ्जों से ही चलता आया है सब कुछ पुराने वक़्त से|
ज़रूरी नही की हरेक कही गयी बात सच ही होती हो, हाँ कुछ कुछ
होते हूँगे जो ऐसा भी करते हूँगे, मगर ज्यादा तर ये सब दावे कहने तक ही सीमित रहते
हैं, खेर! इस में गलत भी कुछ नही, वक़्त और ज़रुरत का हिसाब होता होगा|
पिछले कुछ दिन और रातें ज़रा ज्यादा ही मेहरबान हैं मुझ पर,
शायद इम्तेहान ले रही हैं मेरा, तकलीफ को किनारे रख इस बीच मुझे लगा कुछ ऐसा पड़
लूँ जो वक़्त का इस्तेमाल भी होजये और में तकलीफ को आसानी से मात दे पाऊँ, तो में
ओस्मानिया सल्तनत का इतेहास पड़ने लगा, ओसमान! जिन्होंने करीब 600 साल तक राज किया,
खुद को इस्लामी दुनियाँ का खलीफा मानते थे| खेर!
उस वक़्त ओसमान हकुमत के दरबार में मंत्रियों को पाशा कह कर
बुलाते थे| उन्ही में से एक मंत्री था जिस के बारे में पड़ कर बहुत हंसी भी आई और
सोचने को भी मिला| उसका नाम था “मह्मुत पाशा”, जो की मोजूदा सुल्तान -अब्दुल हामिद
का बेह्नूयी था|
अब गज़ब की बात सुनाता हूँ, वो अपनी सुल्ताना जो की मोजूदा
सुल्तान की बहन थी उसको दुनियाँ की हर उस चीज़ से कोम्परे करता था जो भी खूबसूरती
के लिए मशहूर थी, उसकी बातें क्या ही कहें, जब भी मिलता उसका हाथ चूम, झुक कर सलाम
करता, उसको बगीचे के सबसे खूबसूरत फूलों का गुलदस्ता हर रोज़ पेश करता, उसकी आँखों
को हिरनी की आँखें बताता, उसको बर्फ से ढके पहाडों की ठंडक बताता, Mediterranean के ठहरे पानी जैसा शांत बताता| और
भी नजाने क्या क्या|
लेकिन हकीकत में वो पूरी सल्तनत के खिलाफ साज़शें रचता रहता,
अंग्रेजों से मिलकर शेहरों में आतंक और दंगे करवाता और हमेशा ये कहता की क्या खराब
किस्मत है जो इस औरत से शादी करनी पड़ी, मुझे तो किसी अँगरेज़ लेडी से शादी करनी थी|
ये शायद कोई बड़ी बात नही है क्यूँ की लोग तो ये सब करते ही
हैं और इससे smartness भी कहा जाता है लेकिन हाँ याद
रखना ज़रूरी है की बातें एक तरफ और reality एक तरफ, इन दोनों का मिलन बहुत कम होता है|
हाँ बातों को सच मानना चाहिए लेकिन ख्याल ये भी रहे की ये
बातें कहीं उम्मीदें न बन जाएँ, और जानी! उम्मीदें ही अक्सर दुखों और परेशानी का
कारण हुआ करती हैं| कहीं उम्मीद उनसे न कर लो जो साहब रात का खाया खाना सुबह तक
भूल जाते हैं|
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