Wednesday, May 5, 2021

 

सरलता

सब से मुश्किल काम है दुनियाँ में सरल या आसान होना, इतना सरल की कोई तुम्हें देखते ही पहचान जाए की तुम क्या हो, क्या सोचते हो| सरल इतना हो इंसान को किसी दुसरे को कोई बात पूछने से पहले कहीं बार सोचना न पड़े, किसी को काँधे पे सर रखने में हिचकिचाहट महसूस न हो, किसी को हाथ का सहारा लेते वक़्त सोचना न पड़े| ऐसा हो तुम्हारा बर्ताव के कोई अजनबी भी देख कर मुस्कराने लग जाए| सफ़र में चलते हुए किसी को तुम्हारा नाम या ज़ात पूछ कर बात न करनी पड़े| न हो  कोई पहचान तुम्हारी और न हो कोई तम्घा जो तुम्हें एक आम इंसान से अलग करता हो|

कहीं भी रहो या जाओ हवा और पानी की तरह घुल मिल जाया करो, न रहो किसी विचारधारा से इतने चिपके हुए की कोई उस पे सवाल उठाये और तुम सवाल सह न सको| सोचो ना, अगर हम किसी ख्याल से चिपकें ही न तो सारे फितने, सारे झगडे ही खत्म हो जाएँ, फिर तुम्हें न मंदिर और मस्जिद के होने न होने से फर्क पड़े न किसी के हिन्दू या मुस्लमान या चौधरी-खान होने से|

खेर मुश्किल है सादगी इख्तियार करना, सादा होना| मगर कोशिश ज़रूर करनी चाहिए की जितना होसके खुद को सरल बनाते चलो, धीरे धीरे सब कुछ अपना सा लगने लगे गा|

कभी सोचना की हम कितने पेचीदा हैं, बाज़ार में कुछ, घर में कुछ, दोस्त के साथ कुछ और, दफ्तर में कुछ और, महफ़िल में कुछ और, तन्हाई में कुछ और| कमबख्त कितने ही चेहरे पहने घुमते हैं हम, और फिर यही सब हमें हकीकत लगने लग जाता है वक्त से साथ| सोचो न, ज़िन्दगी इसी शश-ओ-पंज में कट जाती है की किसके सामने कौन सा चेहरा पहन के पेश होना है| पति-पत्नी के लिए अलग चेहरा, माँ -बाप के लिए अलग, दुनियाँ के लिए अलग| ये सब नाटक करते करते हम अपना असलीपन तो भूल ही जाते हैं|

सरल होने का मतलब है जैसे तुम हो वैसा ही रहना, पोलिश या पेंट लगा कर नही| होश में रहना न की हर किसी के इस्तेमाल की चीज़ बन जाना|


                                                ************

1 comment:

                                                                     خود سے ایک گفتگو  باہری خوبصورتی اور حُسن ایک چیز ہے لیکن اصلی خوبصورتی...