चुप्पी और ज़िन्दगी के फैसले
चुप रहोगे तो यूं ही सामान की तरह बेच दिए जाओगे और आपको एहसास
ही नहीं होगा| कुछ भी बन जाओ लेकिन सामान मत बनो, भले ही कितना किम्मति हो सामान
तो सामान ही होता है, जिसका पहले भी कोई मालिक होता है और बाद में भी| आप खुद के
फ़िर कहाँ हुए, खुद के लिए कहाँ जिए, कल तक किसी को खुश किया करते थे आज से किसी और
को करोगे| कोई भी धरम या परंपरा भले ही इस सबको संस्कार कहता रहे लेकिन याद रखो की
आप इस सब केलिए पैदा तो बिलकुल नहीं हुए थे|आगे फैसला आपके हाथ में है या तो सामान
होजाओ या अपने आप का होजाओ, खुद के लिए होजाओ| जब तक आप खुद के ही नहीं हैं तो
दूसरों के लिए क्या करोगे या कर पाओगे|
देखा जाए तो
रास्ते हर मोड़ पर हमेशा दो होते हैं एक आसान दीखता है और दूसरा
कठिन, आसान पे चलोगे तो खुद को खो दोगे, भले कुछ समय तक अच्छा लगेगा, लेकिन अगर
कठिन पे चलोगे तो खुद को पा लो गे, भले शरुआत मुश्किल हो गी| कोई भी फैसला लेते
वक़्त एक आवाज़ हमें अपना आप देता है जिससे मैं अन्दर की आवाज़ कहता हूँ, वो आवाज़
अक्सर सच और सही रास्ता चुनने को कहती है, तब आप अपने आप सोचते हो, आज़ाद हो कर,
बिना किसी डर के, खोफ के| साथ ही एक आवाज़ और होती है वो तब आती है जब आप दूसरों की
नज़र से खुद को देखते हो, और खुद को भूल जाते हो, डर जाते हो, उलझन में पड़ जाते हो
और अक्सर गलत फैसला कर बैठते हो और फ़िर जब कभी आगे चल कर होश आता भी है तो तबतक
बहुत देर हो चुकी होती है| वो लोग जिनके लिए आपने खुदको भूल कर फैसला लिया था वो
कहीं आसपास नहीं होते, उनका काम तो वही तक था|
दुनियाँ में लोग स्वतंत्र फैसले से अक्सर डरते हैं क्यूंकि इस
में आजादी होती है और सच होता है, ज़ाहिर है सच देखना या झेलना इतना आसान नहीं होता,
वो भी वहाँ जहां लोग ख्यालों में जीते हूँ, और जहां सब कुछ पहले से तय हो| जिन
लोगों ने भी अपने फैसले लिए हैं उन्हें भले ही कठनाई सहनी पड़ी हो पर अपने लिए कुछ
तो ढंग का किया ही है और दूसरों के लिए भी| तारीख उन्ही ने रची है जो खुद के तय
किये रास्ते पे निकले हैं, बाकी नजाने कितने आये और कहाँ खप गये कोई इल्म तक नहीं|
रास्ता आप तय करो, क्यूंकि ज़िन्दगी आपकी है, जीना आपको है और जो
आप देख सकते हो वो शायद कोई और न देखता हो,गरज ये है की आप कहाँ खड़े हो कर देख रहे
हैं, दुनियाँ के तय किये दायरे में या किसी ऐसी जगह से जहां से आप सब कुछ देख पाओ.
हमारी शिक्षा का काम इतना होना चाहिए की वो हमें उस जगह पहुँचने में मदद करे और
आगे की राह हम पर छोड़ दे|
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सच है.....।
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