Monday, December 28, 2020

 

                      नाराज़गी खुद से


पता नहीं ये मेरी जिद है या छुपी हकीकत कोई

मैं लाख गुज़ार्शें करता हूँ, फ़िर भी खुद को मना नहं पाता|

एक बात तो पक्की है की मैं खुद से खफा हूँ

नाराज़गी इतनी है की मैं खुद से नज़रें मिला नहीं पाता|

आज खुद को तिराहे पे खड़ा पाता हूँ मैं

किस रास्ते को छोड़ना है किस पे चलना है, मैं खुद को समझा नहीं पाता|

है कुछ भी नहीं, सिवाय ख्यालूँ के मेरे

ये जानता हूँ फ़िर भी ये उलझन सुलझा नहीं पाता|

कहीं बार कुछ रास्ते  अपने घर को जाते दिखते हैं धूर से

फ़िर कोई आ कर बता जाता है की ये रास्ता तेरे घर तक नहीं जाता|


                   ***********

No comments:

Post a Comment

                                                                     خود سے ایک گفتگو  باہری خوبصورتی اور حُسن ایک چیز ہے لیکن اصلی خوبصورتی...