Thursday, May 14, 2020





वो उनका वादा कर के भूल जाना और मेरा देर तक बस उम्मीदें लगाये इंतज़ार मैं बेठे रहना,
बड़ा आम सा हो गया है ये किस्सा,अब तो जैसे आदत सी हो गयी है|


ये दिल की  धड़कन जो कभी तेज़ रफ्तारी में रहती थी, वो जो सनसनी दिल-ओ-दिमाग में रहती थी,
अब तस्सली तो देखो, सनसनी भी नहीं और धड़कन की रफ़्तार अब मधम सी हो गयी है|


इतना  मुश्किल हो गया है पहुंचना उन तक के सदायें तक नहीं आती -जाती,
गोया उन से मिलना या उनको सुन पाना, ईद चाँद की ज़यारत सी हो गयी है|


देख कर ये सब, में थोड़ा ग़मगीन तो हो जाता हूँ, हाँ मगर उनकी भी होंगी मसरूफियाँ काफी,
वो उनकी जुस्तजू मैं मुन्तजिर रहना, वो आस लगाये रखना, ये इंतज़ार न हो कर -इबादत सी हो गयी है|


ये बे-बस्सी है न सीना ज़ोरी कोई, बस एक मुसलसिल आदत सी है,
तुझ से एह ज़िन्दगी एक नादान शरारत सी हो गयी है|


उम्मीद है के कभी तो एहसास हो उनको, कभी तो वो वादा निभाएं, कभी तो इबादत रंग लाये,
नही तो लगता है मेरी ज़िन्दगी को शायद मुझसे ही कोई शिकायत सी हो गयी है|


यूं  तो सबर व तसल्ली खुद के लिए बहुत है, मगर इंतज़ार तो फिर भी रहता ही है,
एह वक़्त ये खुशी अब तेरी इनायत सी हो गयी है|


वो उनका वादा कर के भूल जाना और मेरा देर तक बस उम्मीदैं लगाये इंतज़ार मैं बेठे रहना,
बड़ा आम सा हो गया है ये किस्सा,अब तो जैसे आदत सी हो गयी है|


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