Monday, September 18, 2023

 चेनाब और वो कहानियां 

आज बहुत सारा काम था, शाम हुई तो अजीब सा महसूस हो रहा था, घर आने का मन नही हो रहा था, आज तवी में पानी भी काफी कम था तो उसके किनारे जाने का मन भी नही हुआ, फिर सोचा क्यों न आज चिनाब के किनारे बैठने चला जाऊं| चेनाब वहां से बस दस किलोमीटर दूर थी और में चला गया|

वहां पहुंच कर बहुत खूबसूरत लगा, शाम ढल रही थी, लोग अपने घरों को लौट रहे थे, बहुत सारे परिंदे चहचा रहे थे, नदी बिलकुल शांत थी और ठहरी सी थी, मानो जैसे पहाड़ों से उतर कर थक सी गई हो| में किनारे बैठा, दूर दूर तक कोई नही था बस पेड़, परिंदे, ढलती शाम और नदी की शांत आवाज़| में ने पैर पानी  में रखे तो ऐसा महसूस हुआ जैसे मां ने दिलासा दिया हो, में खुद को बहुत हल्का महसूस कर रहा था जैसे सारे फिक्र और चिंताएं पानी अपने साथ बहा ले गया हो|

नदी के उस पार एक गांव था, कच्चे घर जो मिट्टी से लीपे हुए थे और लोग अपने जानवरों को वापिस ला रहे थे|


तब मुझे बहुत सी बातें याद आईं जो बचपन में कहानियों में सुनी थीं, मेरे लिए चिनाब सिर्फ एक नदी नहीं है, बहुत कुछ है| प्रेम क्या होता है सबसे पहले मैं ने चेनाब की कहानियों में ही सुना था, बड़े दादा को कहानियां सुनने का बहुत शौक था वो मुझे बचपन में बहुत सी कहानियां सुनाया करते थे, वो कहते थे हमारा गांव चेनाब और जेहलम के बीच में पड़ता है इसी लिए इतना ठंडा और खूबसूरत है| तब मैं इन दोनों नदियों के तसवर किया करता और सोचता रहता कि आखिर कैसी दिखती होगी चेनाब| 

सब कहानियों में से मुझे हीर और रांझा की कहानी बहुत खूबसूरत लगती थी, उस कहानी में प्रेम के वो एहसास थे जो में महसूस किया करता था, हीर और रांझा एक दूसरे से बेहद प्रेम करते थे मगर वो नदी के किनारे बसे दो अलग अलग गांव में रहते थे, उस वक्त नदी को पार करना बहुत मुश्किल था तो वो कभी भी एक दूसरे से मिल नही पाते थे, कहते हैं वो एक दूसरे को संदेश भेजते थे मिट्टी के घड़े में रख कर| कभी कभी जब रांझा को बहुत याद आती तो वो शाम को नदी किनारे चला जाता और हीर अपने घर में दिया जला देती, वो उस दिए को देखता और सोचता हीर को देख रहा है| उनकी बस इतनी सी मुलाकात हो पाती थी| कितना पवित्र और खूबसूरत रिश्ता था| में तब भी ये सोचता था कि उनको कितना बुरा लगता होगा, उनको कैसा महसूस होता होगा| 


में बड़े दादा से बहुत सवाल पूछता और दादा हंस देते और बात को टाल देते| हीर और रांझा की कहानियां हमारे पहाड़ में और पंजाब में बहुत सुनाई जाती हैं, जब मैं बड़ा हुआ और पहली बार चेनाब को देखा तो मेरी नजरें हीर और रांझा की कहानी डूंड रही थीं| वो पहले पहले एहसास थे प्रेम के| आज भी याद हैं| आज वहां बैठ कर सारी बातें याद आईं, बहुत अलग महसूस हुआ|

देख रहा था आज चेनाब को पार करना कितना आसान है मगर आज कोई हीर और रांझा नही हैं, हो ही नही सकते, प्रेम है ही इतना नायाब कि हर जगह नही मिलता| वो कहानियां आज भी कितना असर डालती हैं मन पर, कितनी सच्ची लगती हैं, शायद सच हमेशा रहता है|


हीर और रांझा कभी मिल नही पाए थे और उसी नदी में समा गए थे लेकिन वो आज भी कितने मोजूद हैं हमारी कहानियों में, इस नदी की खामोशियों में, इस ठंडक में, इस बहाओ में| 

शाम हो गई थी, में बे मन से उठा और वापिस लौट आया, पता नही क्यों ऐसा लगा जैसे किसी अपने से मिल कर आया जो हमेशा वहीं रहेगा जब मन होगा फिर से चला जाऊंगा| कुदरत से प्रेम और कुदरत का प्रेम कितना हसीन है, इंसान के लफ्ज़ी शगूफों से कहीं दूर और परे|


जम्मू 

18 september

2023





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