Apni apni baaten.............
अगर देखा जाए तो जो भी इंसान कठिन रास्तों पर चला है
या अपना रास्ता खुद चुन कर चला है, तो उसके पेरूं में छाले ज़रूर हूँगे, ज़ख्म भी ज़रूर
हूँगे| कोई चलते चलते थक हार कर लौट आया होगा और कोई हार कर भी चलता रहा होगा|
ज़ख्म दोनों पे आये हूँगे, तकलीफें और कठनाईयां सबको
झेलनी पड़ी हूँगी, अपना चुना रास्ता जो था, लेकिन किसी ने हार मान ली और कोई चलता
रहा मसल्सल| शायद हर क़दम को मंजिल की नज़र से देखा होगा|
कोई आपने ज़ख्मों को दिखाता है और कोई छुपाता है और
किसी को वो ज़ख्म ही नही लगते, कोई उन्हें वक्तन-फ-वक्तन ख्रोद्ता रहता है और कोई
उन्ही ज़ख्मों में मिटटी भर कर फूल उगा लेता है, गोया उसके वो ज़ख्म गुलज़ार होगये और
फिर वो ज़ख्म कहाँ रहे|
खुद के एहसास और खुद के साथ प्रेम और दोस्ती के बराबर
तो कोई चीज़ हो ही नही सकती| जिस ने खुद को पा लिया उस ने सब को पा लिया, फिर उससे
हर चीज़ में प्रेम दिखने लगेगा|
कोई भी खाली या कोरा नही होता, हाँ कुछ अनजान ज़रूर
होते हैं, जो भी मुश्किल राहों पे चला उसने खुद का साथ पा लिया| और खुद में ही सब
समाया है, नफरत, मोहब्बत, अँधेरा, रौशनी सब कुछ| तुम जिस काबिल हो उससे तुम पा
सकते हो|
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