मोहब्बत!क्या है? क्या मोहब्बत करनी चाहिए|
(14 साल के मेरे छोटे भाई का मुझसे सवाल)
ये काम काफी कठिन है, काफी
मुश्किल है निभाना इससे, बहुत इमानदारी और सचाई, हिम्मत मांगती है ये| खुद का बनाया
संसार, दुनियाँ की दी पहचानें मिटा देती है ये, बहुत सारे सच दिखला देती है ये,
इससे सच में कर पाओ और इस में रह पाओ ये आसान बात बिलकुल नहीं| बड़े बड़े आधे रास्ते
से थक कर लौट जाते हैं और कुछ तो सफ़र शुरू करने से पहले ही थक जाया करते हैं| बहुत
ज़िम्मेदारी का काम है दोस्त, हर कोई नही कर पाता| जाने कितनी ही बार हारना पड़ता है
बिना झुके हुए, कितनी बार गिरना पड़ता है और फिर से उठ कर चलना पड़ता है बिना किसी
सहारे के|
हाँ, ये सच है की मोहब्बत होना
बड़ी चीज़ है और उससे भी बड कर है इससे निभा पाना| इसका आनंद और एहसास दुनियाँ के
किसी भी pleasure या luxury में नही| और भी बहुत कुछ है जो बयाँ नही किया जा
सकता| ये खूबसूरत है मगर कठिन है, ये हो तो किसी मंदिर -मस्जिद या भगवन की ज़रुरत
नही रहती| सारी दीवारें टूट जाया करती हैं इस में|
ये सब है, मगर तुम करना मत!
होसके तो दर-गुज़र करना और ध्यान मत देना| तुम जीवन में कुछ और करना, जो कम कठिन हो
मगर काम अच्छा हो, बस एक अच्छा इंसान बन के जीना, इतना बहुत है| तुम जब बड़े हो जाओ
तो शादी कर लेना, वो बहुत आसान काम है, सारा समाज तुमसे ये एक उम्मीद तो हमेशा
रखता है| सब करते आये हैं तो तुम भी कर लेना, इतना आसान काम जो है| भले ही मज़हब -समाज
इससे पवित्र मानता हो ये है बस एक deal| ये आसान है, यहाँ तुम कम ज़िम्मेदार होसकते हो, सच न बोलो तो भी चलता है|
ज़िन्दगी कट जाती है और एकदिन गुज़र जाते हो तुम| बस यही तो जीवन की परिभाषा है|
मोहब्बत तुम्हें वो आराम, तस्सली
ज़रूर देती है लेकिन तकलीफ भी कुछ कम नही देती| इसलिए मेरी सुनो तो कुछ और करना,
अपनी energy किसी और अच्छे काम में लगाना,
जिससे तुम्हें और समाज को कुछ अच्छा मिले| मैं जानता हूँ इस उम्मर में ऐसे ख्याल
और सवाल आने वाजिब हैं, लेकिन फैसले अक्सर सोच समझ कर करने होते हैं, धूर की सोच
कर, न की जज़्बात में आ कर| कभी तुम्हें लगेगा की ये सब बहुत खूबसूरत है लेकिन इस
रास्ते चलने से पता लगता है की ऐसा कुछ भी नही है| Bollywood की फ़िल्में ज़िन्दगी की हकीकत से बहुत अलग हैं, उन पे
यकीन मत करना|
आखिर में इतना कहों गा की
अपना एक मकसद बनाओ ज़िन्दगी का, जो सिर्फ तुम्हारा हो, किसी और का नही, अकेले चलो
और निडर हो कर चलो, मैं यकीन दिलाता हूँ की तुम बहुत जल्दी पहुँचो गे और बहुत कुछ
कर पाओ गे
मैं आज सोचता हूँ की अगर
तुम्हारी उम्मर का होता तो बहुत सी गलतियाँ न करता, मेरी ज़िन्दगी में और भी
मुश्कलें थी जो तुम्हारे सामने आज नही हैं, और एक-आध गलतियाँ भी की मैं ने जीवन
में, इसलिए शायद थोड़ी देर हो गयी| मगर तुम्हारे पास मैं हूँ, कभी हाथ थामना हो तो
बताना लेकिन सिर्फ कुछ देर ही थाम पाऊँगा, क्यूंकि चलना तो तुम्हें खुद ही है|
मेरे पास हाथ थमने के लिए कोई नही था और मैं ने किसी को सहारा बनाया भी नही|
Your
well-wisher, your eldest brother “Shafiq”
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