Sunday, January 10, 2021

 

             प्रेम!

 

ये लफ्ज़ सुनते ही हमें हिंदी सिनेमा के कुछ डायलाग या इमोशनल सीन याद आ जाते हैं, याँ लाल रंग का गुलाब, एक काल्पनिक दिल, लड़का-लड़की ये सब हमें याद आते हैं| एक आम इंसान के लिए प्रेम सिर्फ इन्ही चीज़ों तक सिमट जाया करता है| इसी से जुड़ा एक हिस्सा और भी होता है जो सिनेमा के प्रेम का एहम हिस्सा माना जाता है|

मगर प्रेम एक बहुत ही अलग चीज़ है जो बयान नही की जा सकती, बस महसूस की जा सकती है, बहुत ही रेयर है ये प्रेम, दुनियाँ में चंद ही किस्से ऐसे मिलते हैं जो सच्चे प्रेम के होते हैं, दुनियाँ उन्हें कभी भूल नहीं पाती, वो किताबों का हिस्सा बन जाते हैं, आम लोगों की जुबां का चर्चा बन जाते हैं| आखिर क्यूँ? शायद इसलिए की वो प्रेम करते नहीं प्रेम में होते हैं, दुनियावी गलत सही, लेन-देन से कहीं धूर, रस्म -ओ- रिवाज, मज़हब ज़ात से कहीं ऊपर, लालच से बहुत धूर, वफ़ा-बेवफा से प्रे|

मैं ने एक बज़ुरग को बचपन में ये कहते सुना था की बेटा प्रेम और दोस्ती हर किसी के बस की बात नहीं होती, तब मैं हंसता था और उनको बोलता था की जो भी हो मुझे क्या लेना-देना, मगर आगे चलके जीवन ने बताया की वो सच ही कहते थे|

प्रेम वो है जो इंसान के अन्दर होता है , किसी के लिए जगता है और फिर परवान चड़ता है, इसकी कोई मंजिल नहीं होती बल्कि ये हर दिन बड़ता चला जाता है, किसी को कह कर या ज़बरदस्ती करवाया जाये वो प्रेम नहीं होता, फिर तो प्रेम एक काम बन जाता है, प्रेम कहाँ रहता है| प्रेम में वफ़ा -बेवफा, धोका , धुरी, नजदीकी जैसा कुछ शायद ही होता है| प्रेम वो है जो इंसान बिना किसी लालच के करता है, तभी तो निराशा या नाराज़गी का कोई सवाल ही नहीं होता, जो जैसा होता है इंसान उससे वैसा ही स्वीकार करता है, न की उसको बदल कर उससे प्रेम का दावा करता है| इसमें कोई तू या मैं नहीं रहता, इसिलए शायद जब किसी को तकलीफ होती है तो आपको भी तकलीफ होती है, क्यूंकि आप उस शख्स को अपना ही एक अंग मानते हैं इसलिए दर्द महसूस कर पाते हैं|

प्रेम बड़ा खूबसूरत एहसास है पर अफ़सोस बहुत रेयर है, कोई क़दर नहीं करता इसकी आज की दुनियाँ में, शायद कोई इससे समझ ही नहीं पाता, शायद ये है ही बहुत ऊंची चीज़, पर यकीन मनो हम सबके अन्दर होता है प्रेम, अब न समझें तो ये हमारी कम-अकली है|

प्रेम वो है की जब तुम तकलीफ में रहो तो उनको बिन बताये एहसास हो जाये, वक़्त हालात कैसे भी हूँ पर तुम अपने लफ्जों से पलट न पाओ, दुनियाँ जहां गलत कहता रहे पर तुम्हारा विश्वास कम न होने पाए| अगर करना चाहो तो दुनियाँ में कुछ नामुमकिन नहीं है साहब बस हरेक क़दम पे भरोसा चाहिए|

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