Saturday, January 16, 2021

 samjhota


थमी हूँ अगर नज़रें, शांत हूँ अगर आँखें, चेहरे पे हो अगर एक घुम्नाम सी हंसी

तो जान लेना की ज़िन्दगी से कोई तो समझोता होगया|

झुकी हूँ अगर नज़रें और सर न उठता हो तकरार में

यूं मान लेना की कुछ तो गलत फैसला होगया|

नज़र अगर न मिला पाओ तुम खुद से आईने में देख कर

तो समझ जाना की तुम्हारा कहीं न कहीं हकीकत से सामना होगया|

और अगर तुम्हें याद दिलाना पड़े किसी को याद करने के लिए

तो बहाने मत करना, साफ़ कह देना की छोडो अब मामला पुराना होगया|

अगर न जले दिया उस घर में कहीं रोज़ तक

तो ज्यादा परेशान मत होना, ये समझ लेना की उस घर में रहने वालों का कहीं और ठिकाना होगया|

बार बार सुनाने पर भी अगर कोई घोर न करे तो

तो लौट जाना, ये समझ लेना की वक़्त गुज़रा तो नए किस्से बने, तेरा किस्सा अब पुराना होगया|

कोई न सुने फरयाद तो आवाज़ धीमी कर घर चले जाना

कह देना खुद से हर  बात अछि-बुरी, कर लेना गिले-शिकवे सारे, समझ लेना अब से तू खुद का दोस्ताना होगया|

                                

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