samjhota
थमी हूँ अगर नज़रें, शांत हूँ अगर आँखें, चेहरे पे हो अगर एक
घुम्नाम सी हंसी
तो जान लेना की ज़िन्दगी से कोई तो समझोता होगया|
झुकी हूँ अगर नज़रें और सर न उठता हो तकरार में
यूं मान लेना की कुछ तो गलत फैसला होगया|
नज़र अगर न मिला पाओ तुम खुद से आईने में देख कर
तो समझ जाना की तुम्हारा कहीं न कहीं हकीकत से सामना होगया|
और अगर तुम्हें याद दिलाना पड़े किसी को याद करने के लिए
तो बहाने मत करना, साफ़ कह देना की छोडो अब मामला पुराना
होगया|
अगर न जले दिया उस घर में कहीं रोज़ तक
तो ज्यादा परेशान मत होना, ये समझ लेना की उस घर में रहने
वालों का कहीं और ठिकाना होगया|
बार बार सुनाने पर भी अगर कोई घोर न करे तो
तो लौट जाना, ये समझ लेना की वक़्त गुज़रा तो नए किस्से बने,
तेरा किस्सा अब पुराना होगया|
कोई न सुने फरयाद तो आवाज़ धीमी कर घर चले जाना
कह देना खुद से हर
बात अछि-बुरी, कर लेना गिले-शिकवे सारे, समझ लेना अब से तू खुद का दोस्ताना
होगया|
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