A realization/एक एहसास
सारी दुनियाँ अक्सर दो चीजों के पीछे रहती है , “खूबसूरती
और चैन” दोनों बहुत ही नायाब हैं, हर किसी को मिलते नहीं, इंसान इसकी तलाश में
क्या क्या नहीं करता, कभी खुद को खूबसूरत बनाने के हज़ार नुस्खे अपनाता है और कभी
चैन पाने के लिए महबूब और मुहब्बत की तलाश में रहता है, चाँद तारों से तुलना करता
है और नजाने क्या क्या करता है| मगर खूबसूरती और चैन तो कहीं मिलता नहीं, अगर कहीं
थोडा बहुत एहसास होता है तो वो वक्ती या कुछ पल का होता है, वक़्त के साथ साथ बाहरी
खूबसूरती तो बदल जाया करती है| असल में
इंसान के अन्दर जो चीज़ है उसको बाहर डूंडता फिरता है वो, अमन, चैन और सुन्दरता तो
इंसान के अन्दर होती है बस वो उसे देख नही पाता| ज़रूरी नहीं की महबूब हो तो तभी मुहब्बत होती है, वो तो बस एक जरिया है आपके
अन्दर छुपी हुई मुहब्बत को जगाने का|
आज सुबह पहाड़ में सफ़र करने का मौक़ा मिला, थोड़ी देर सोया और
फिर जाग गया, आँखें खुलते ही एक अजब सा नज़ारा देखा, ठंडी ठंडी हवा, रात की वो
खूबसूरत चुपी, झील में ठहरा हुआ वो पानी और उसकी शांति, चाँद की फूटती रौशनी मद्धम-मद्धम सी जैसे सोयी हुई बस्ती को
बेदार हो जाने की दावत देती हो, गाड़ी में
सब कुछ भूल कर एक दुसरे के कंधे पर सर रख सोते हुए लोग, उतराई और चढाई में गाडी की
बदलती आवाजें, दूर कहीं गाँव में जलते बिजली
के बल्ब जैसे आसमान में सितारे और चादर ओढ़ के खिड़की से बाहर देखता और मुस्कराता मै| यू मानिये जैसे आज ही जन्म हुआ हो मेरा, जैसे सबकुछ नया नया हो और मेरे लिए
ही हो, ना अतीत ना मुस्तकबिल, ना आगाज़, ना अंजाम, कुछ भी याद ना था मुझे, बस देखे
जा रहा था और मुस्कराए जा रहा था, एकांत में, वर्तमान में, बिना किसी से कुछ
चाहे हुए, बिना किसी को परखे हुए, बिना किसी से नाता-रिश्ता बनाये हुए| जैसे मेरे अन्दर एक शांत समुन्दर हो
एकदम थमा हुआ, और मैं अपने ही अन्दर की
आवाज़ सुन पा रहा था, ये शान्ति, ये पूर्णता का एहसास, ये ख़ामोशी हम सब के अन्दर है,
मगर हम अक्सर दूसरों के अन्दर ढूँढ़ते हैं और खुद को भूल जाते हैं| काश हम हर दिन
यूं ही जी पायें!
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वाह !!! सुंदर
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