पेहचान
हम ने कब कहा की तुम हमारी पेहचान बनो
तुम अपनी ही पेहचान
हो, अपनी ही पेहचान रहो
मगर जो तुम सच में
हो, व्ही रहो.
कल किसी को देख कर
खुद को बदला था
आज किसी और को देख
के बदलो गे
तुम फिर, तुम कहाँ
रहे
तुम ने तो खुद को
खो दिया.
तुम जैसे हो वैसे
ही रहो
किसी को पसंद आओ
या ना आओ
कम से कम जो हो
असली तो हो.
उम्दा👌👌👌
ReplyDeleteaafreen
Delete