Wednesday, September 2, 2020

          

                         पेहचान

 

 

हम ने कब कहा की तुम हमारी पेहचान बनो 

तुम अपनी ही पेहचान हो, अपनी ही पेहचान रहो

मगर जो तुम सच में हो, व्ही  रहो.

 

कल किसी को देख कर खुद को बदला था

आज किसी और को देख के बदलो गे

तुम फिर, तुम कहाँ रहे

तुम ने तो खुद को खो दिया.

 

तुम जैसे हो वैसे ही रहो

किसी को पसंद आओ या ना आओ

कम से कम जो हो असली तो हो.

 

2 comments:

                                                                     خود سے ایک گفتگو  باہری خوبصورتی اور حُسن ایک چیز ہے لیکن اصلی خوبصورتی...