खाली खाली
ये समां खाली खाली
ये जगह खाली खाली
भरा है अन्दर कई चीजों
से मगर वो जगह दिखे खाली खाली|
वो मुस्कान, वो गुस्सा,
वो डांट नहीं दिखे आज
ये भरा अन्दर, ये
सुहाना मौसम आज लगा खाली खाली|
आज चुप हुआ तो कोई
गुस्सा करने नहीं आया, आज नहीं पूछा किसी ने कि तूने क्या खाया?
एहसास तो देर में
हुआ पर, भरा बर्तन लगा खाली खाली|
कभी आना कभी जाना
तो रीयत है ज़िन्दगी की, बेहिसाब अवा-जाई है
मगर गौर से देखा
तो लगा कि अपने ही अन्दर कोई जगह हो गयी है खाली खाली|
जानता हूँ मन का
किया धरा है ये, आरज़ी है
मगर हक़ीक़तन हवा
लगी खुश्क खुश्क, ये ज़मीन लगी खाली खाली|
रिश्तों में मिलना
बिछड़ना तो क्या ही मायने रखा करता है
मगर फिर भी इस कमबख्त
मन को लगा आज सब कुछ खाली खाली|
ये समां खाली खाली
ये जगह खाली खाली
भरा है अन्दर कई चीजों से मगर वो जगह दिखे खाली खाली|
For my dear sister.
No comments:
Post a Comment