Saturday, April 18, 2020


                                               काश ऐसा हो !!


एह काश ऐसा हो, के जब मैं दुनियाँ की कशमकश से थक जाऊं
तू आ कर सामने मेरे फूल सा मुस्कराया करे|


तेरी मासूमियत देख कर, तेरी मुस्कराहट देख कर
आंखू  में मेरी एक दरया सा मचल जाया करे|


देख कर मेरी बे-चेनी तू मुझे समझाया करे
तू मिल कर साथ मेरे मेरी उल्झानू सुलझाया करे |


ये कह कर के सब ठीक हो जाये गा न
तू मुझे फिर से चलने का भरोसा दिलाया करे |


फिर जब कभी में सेहम जाया  करू मुश्किलों को देख कर
तू मुझे दे कर दिलासा मेरी हिम्मत बडाया करे|


कभी अगर में भटक जाऊं रास्ते से या मुहं मोड़ लू सचाई से
तू घुस्से से चिला कर मुझे गलत होने का एहसास दिलाया करे |


में जानता हूँ के ये महज़ एक तसावर है मेरा, एक ख्याल सा है
काश ऐसा हो के ये ख्याल हकीक़त हो जाया करे |


फिर  सोचता हूँ के शायद ये खुदगरजी हो गी मेरी
ये भी तो गलत है न के तू मेरी खातिर परेशान हो जाया करे |

काश ऐसा हो के जब में दुनियाँ की कशमकश से थक जाऊं
तू आ कर सामने मेरे फूल सा मुस्कराया करे ||
                                                                                              शफीक -रुद्रप्रयाग

                                      *************


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