काश ऐसा हो !!
एह काश ऐसा हो, के जब मैं
दुनियाँ की कशमकश से थक जाऊं
तू आ कर सामने मेरे फूल सा
मुस्कराया करे|
तेरी मासूमियत देख कर,
तेरी मुस्कराहट देख कर
आंखू में मेरी एक दरया सा मचल जाया करे|
देख कर मेरी बे-चेनी तू
मुझे समझाया करे
तू मिल कर साथ मेरे मेरी उल्झानू सुलझाया करे |
ये कह कर के सब ठीक हो जाये
गा न
तू मुझे फिर से चलने का
भरोसा दिलाया करे |
फिर जब कभी में सेहम जाया करू मुश्किलों को देख कर
तू मुझे दे कर दिलासा मेरी
हिम्मत बडाया करे|
कभी अगर में भटक जाऊं
रास्ते से या मुहं मोड़ लू सचाई से
तू घुस्से से चिला कर मुझे
गलत होने का एहसास दिलाया करे |
में जानता हूँ के ये महज़
एक तसावर है मेरा, एक ख्याल सा है
काश ऐसा हो के ये ख्याल
हकीक़त हो जाया करे |
फिर सोचता हूँ के शायद ये
खुदगरजी हो गी मेरी
ये भी तो गलत है न के तू
मेरी खातिर परेशान हो जाया करे |
काश ऐसा हो के जब में
दुनियाँ की कशमकश से थक जाऊं
तू आ कर सामने मेरे फूल सा
मुस्कराया करे ||
शफीक -रुद्रप्रयाग
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