फ़िक्र
ये रात का सनाटा, ये बारिश की
आवाजें, ये खोफ से भरा
मौसम,
सोयी है दुनियाँ नींद आराम की और मुझे है फ़िक्र तेरी||
मैं हूँ ठीक की नहीं ये पूछना तो चलो हुई बात निराली,
तू है कैसा ,किस हाल मैं है, मुझे सताती है
बहुत फ़िक्र तेरी||
आज जब के दुनियाँ परेशान हाल है
काफी, हर तरफ उदासी ही
उदासी है,
मुझे होती है हर हाल फ़िक्र तेरी||
तू लापरवाह है बहुत ये बात तो पता है मुझे,
तेरी ये लापरवाही बढ़ा देती है फिकर मेरी||
मैं दुआगो हूँ की तू बस अच्छा हो, खुश हो,
मुझे तो अभी सोचना है कैसे कटेगी ये रात मेरी||
शफीक||
good
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