ऐसा कोई तो है
वो जिस से परेशानी बताता हूँ में अपनी आ कर, देता है वो तस्सली ऐसी के परेशानी -परेशानी नहीं रहती
चलो यहाँ ऐसा इन्सान कोई तो है, जो देखता है तारीखी व दिमागी लाकीरू से उठ कर ,ऐसा इन्सान कोई तो है,
वो जिस से शिकायतें करके दुनिया की थोडा सकून आता है, वो जिस की बातें सुन कर थोडा जनून अत्ता है,
देखो इस कांटो के जंगल मैं खिला गुल ऐसा कोई तो है , जिस से फिकर है औरूकी खुद की तरह , ऐसा मेहरबान कोई तो है,
मैं जब थक जाता हूँ लोगूँ से तर्क करते करते , तब वो अक्सर याद आता है,
ये सोचता हूँ जब के मैं नही हूँ गलत तो थोडा होंसला बढ़ जाता है, ख्याली ही सही पर चलो सहारा कोई तो है
दुनिया सच मैं बढ़ी अजीब जगह है और इसकी अनोखी कहानी है , कोई रहता है यहाँ आसमान मैं उढ़ता, कोई ज़मीन से रहता है जुड़ा, कोई मालिक है बना हुआ और कोई गुलाम है बना हुआ,
हैं फिर भी यहाँ मेहरबान इन्सान काफी, जो देखते हैं दूसरू को अपनी जगह रख कर , बाकी हैं अनजान मुझसे , लेकिन ऐसा जानकार मेरा कोई तो है ,
कभी कभी ये सोच आती है के ज़िन्दगी की किताब मैं एक पन्ना जोड़ लूं ,
फिर ये ख्याल भी आता है के, के कहीं किताब ही ना जलानी पढ़ जाये, खेर जो भी हो , ये बस एक पेशनगोई ही तो है.
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